Headline
नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा, काशीपुर में बोले सीएम धामी
नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा, काशीपुर में बोले सीएम धामी
“आंगन का मिलन” कार्यक्रम बनेगा सेवा, पोषण, स्वास्थ्य और जनसहभागिता का व्यापक अभियान- रेखा आर्या
“आंगन का मिलन” कार्यक्रम बनेगा सेवा, पोषण, स्वास्थ्य और जनसहभागिता का व्यापक अभियान- रेखा आर्या
सार्वजनिक स्थान पर हुडदंग मचाने वालों की दून पुलिस ने उतारी खुमारी, 9 युवक हिरासत में
सार्वजनिक स्थान पर हुडदंग मचाने वालों की दून पुलिस ने उतारी खुमारी, 9 युवक हिरासत में
​अपराध का स्वरूप भले ही बदला हो, कानून अब और भी सख्त, बेटियां डरें नहीं, आवाज उठाएं- कुसुम कंडवाल
​अपराध का स्वरूप भले ही बदला हो, कानून अब और भी सख्त, बेटियां डरें नहीं, आवाज उठाएं- कुसुम कंडवाल
हरियाणा की युवती नदी के बहाव क्षेत्र में फंसी, SDRF ने बचाया
हरियाणा की युवती नदी के बहाव क्षेत्र में फंसी, SDRF ने बचाया
एमएसएमई योजनाओं पर सेमिनार आयोजित, उद्यमियों को वित्तीय सहायता और बाजार सुविधाओं की दी जानकारी
एमएसएमई योजनाओं पर सेमिनार आयोजित, उद्यमियों को वित्तीय सहायता और बाजार सुविधाओं की दी जानकारी
जनगणना 2027 के द्वितीय चरण को लेकर कार्मिकों को दिया प्रशिक्षण
जनगणना 2027 के द्वितीय चरण को लेकर कार्मिकों को दिया प्रशिक्षण
हरिद्वार में युवक को निशाना बनाकर चली गोली, लिव-इन पार्टनर घायल
हरिद्वार में युवक को निशाना बनाकर चली गोली, लिव-इन पार्टनर घायल
लुधियाना में CM मान के काफिले पर टमाटर फेंकने का आरोप, रवनीत बिट्टू हिरासत में
लुधियाना में CM मान के काफिले पर टमाटर फेंकने का आरोप, रवनीत बिट्टू हिरासत में

बहुचर्चित रणबीर सिंह हत्याकांड में दोषी ठहराए गए पांच पुलिसकर्मियों को सर्वोच्च न्यायालय से मिली जमानत

देहरादून। बहुचर्चित रणबीर सिंह हत्याकांड में दोषी ठहराए गए पांच पुलिसकर्मियों को सर्वोच्च न्यायालय से जमानत मिल गई है। इनमें इंस्पेक्टर संतोष कुमार जायसवाल, दारोगा नितिन चौहान, नीरज यादव, जीडी भट्ट और कांस्टेबल अजीत शामिल हैं। पांचों दोषी पुलिस विभाग से बर्खास्त हैं।

दून में तीन जुलाई 2009 को गाजियाबाद निवासी रणबीर सिंह का पुलिस ने फर्जी एनकाउंटर किया था। रणबीर एमबीए का छात्र था। उसके शरीर पर गोलियों के दो दर्जन से अधिक निशान मिले थे। पुलिस का कहना था कि रणबीर पर उन्हें वसूली गिरोह के सदस्य होने का संदेह था और उसने तत्कालीन चौकी प्रभारी आराघर जेडी भट्ट की सर्विस रिवाल्वर लूटने का प्रयास किया था। इसीलिए उसका एनकाउंटर करना पड़ा। हालांकि, न्यायालय में पुलिस की कहानी फर्जी साबित हुई। वर्ष 2014 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने इस मामले में उत्तराखंड के 18 पुलिसकर्मियों को हत्या, अपहरण, सुबूत मिटाने, आपराधिक साजिश रचने और गलत सरकारी रिकार्ड तैयार करने का दोषी करार दिया था।

घटना वाले दिन रणबीर सिंह नौकरी के लिए इंटरव्यू देने गाजियाबाद से दून आया था। यहां किसी बात को लेकर उसकी कुछ पुलिसकर्मियों से मामूली कहासुनी हो गई। इस पर पुलिस ने उसे बदमाश बताकर मार डाला और घटना को एनकाउंटर करार दे दिया। इसके लिए पुलिसकर्मियों को सम्मानित भी किया गया था। बाद में रणबीर के परिवार की मांग पर मामले की सीबीआइ जांच हुई, तब फर्जी एनकाउंटर से पर्दा उठा। जांच में पता चला कि उत्तराखंड पुलिस ने खुन्नस निकालने के लिए रणबीर का फर्जी एनकाउंटर किया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मामले का ट्रायल उच्च न्यायालय दिल्ली ट्रांसफर किया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top