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ब्यास (पंजाब) का ऐतिहासिक संत मिलन 

ब्यास (पंजाब) का ऐतिहासिक संत मिलन 

पंजाब।  आज ब्यास, पंजाब स्थित राधा स्वामी डेरा में एक पावन और ऐतिहासिक संगम देखने को मिला। राधा स्वामी डेरा ब्यास के प्रमुख पूज्य बाबा गुरिंदर सिंह जी ढिल्लों एवं उत्तराधिकारी जसदीप सिंह गिल साहब से पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉक्टर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज का आत्मीय एवं भावपूर्ण मिलन हुआ।

इस अवसर पर बाबा अर्जुन सिंह दौधर, डॉ. अवतार सिंह शास्त्री, अहमदाबाद के सुप्रसिद्ध समाजसेवी पवन सिन्धी, जोनल प्रमुख गुरमिंदर सिंह सहित अनेक संत-विद्वान और समाजसेवी उपस्थित रहे।उन्होंने इसे समाज और धर्म की एकता का अद्भुत उदाहरण बताते हुए इसे राष्ट्र व मानवता के लिए शुभ संकेत बताया।

ब्यास पधारने पर पूज्य बाबा गुरिंदर सिंह जी ने अत्यंत आत्मीयता और स्नेह के साथ पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉक्टर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज का स्वागत किया। इस भेंटवार्ता में सनातन धर्म की प्राचीन परंपरा, सिख परंपरा की गरिमा और शिक्षक धर्म की महत्ता पर गहन चर्चा हुई।

बाबा गुरिंदर सिंह जी ने कहा कि गुरुद्वारा केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि सेवा, त्याग और शिक्षा का केंद्र है, जहाँ मानवता को जोड़ने और समाज को मार्ग दिखाने का कार्य होता है। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि सिख परंपरा गुरु और शिक्षक को सर्वोच्च मानती है, वहीं सनातन धर्म भी गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप में मान्यता देता है। दोनों परंपराओं का उद्देश्य एक ही है— समाज को प्रेम, सद्भाव और अध्यात्म के मार्ग पर अग्रसर करना।

पूज्य निरंजन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉक्टर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि सनातन धर्म का मूल संदेश है “वसुधैव कुटुम्बकम्” — पूरी पृथ्वी को एक परिवार मानकर चलना। सिख परंपरा और शिक्षक धर्म इस विचार को और सशक्त बनाते हैं। यदि गुरु और संत मिलकर समाज को मार्गदर्शन दें तो निश्चित ही राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन आएगा।

आगामी महाकुंभ के आयोजन को लेकर भी दोनों महान संतों के बीच विशेष संवाद हुआ। इसमें विचार रखा गया कि संत समाज के मार्गदर्शन और संगठित प्रयासों से लोगों की आस्था को नई शक्ति मिलेगी। समाज में खुशहाली, रोजगार और आत्मनिर्भरता का मार्ग खुलेगा तथा आने वाली पीढ़ियाँ धर्म, शिक्षा और संस्कृति से गहराई से जुड़ सकेंगी।

आज का यह संत मिलन न केवल धर्म और समाज के लिए ऐतिहासिक है, बल्कि यह आने वाले समय में एक नई दिशा और नई ऊर्जा देने वाला साबित होगा।

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