बच्चे की उम्र बढ़ने के साथ उसकी लंबाई में भी बदलाव होना सामान्य प्रक्रिया है। लेकिन अगर उम्र के हिसाब से बच्चे की हाइट में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो रही है, तो माता-पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है। कई बार कम लंबाई का कारण आनुवंशिक होता है और बच्चा पूरी तरह स्वस्थ रहता है। वहीं, कुछ मामलों में धीमी ग्रोथ शरीर में पोषण की कमी, हार्मोनल समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी का संकेत भी हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चे की हाइट का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि वह अपने दोस्तों या हमउम्र बच्चों से कितना छोटा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह देखना है कि बच्चे की ग्रोथ समय के साथ किस गति से हो रही है। यदि बच्चा लगातार अपनी सामान्य ग्रोथ रफ्तार से बढ़ रहा है, तो कम कद कई बार सामान्य शारीरिक विशेषता हो सकता है।
माता-पिता की हाइट का भी पड़ता है असर
बच्चे की लंबाई निर्धारित करने में आनुवंशिकता की बड़ी भूमिका होती है। यदि माता-पिता दोनों की लंबाई अपेक्षाकृत कम है, तो बच्चे की हाइट भी स्वाभाविक रूप से कम रह सकती है। ऐसे मामलों में बच्चा स्वस्थ होने के बावजूद अपने हमउम्र बच्चों की तुलना में छोटा नजर आ सकता है।
कुछ बच्चों में शारीरिक विकास और किशोरावस्था की शुरुआत थोड़ी देर से होती है। ऐसे बच्चों में बाद के वर्षों में ग्रोथ स्पर्ट देखने को मिल सकता है और वे आगे चलकर सामान्य लंबाई हासिल कर सकते हैं।
पोषण की कमी भी हो सकती है वजह
बच्चे के शारीरिक विकास के लिए पर्याप्त कैलोरी, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल जरूरी होते हैं। लंबे समय तक संतुलित आहार न मिलने की स्थिति में ग्रोथ प्रभावित हो सकती है। आयरन, आयोडीन और विटामिन ए जैसे माइक्रोन्यूट्रिएंट्स भी सामान्य वृद्धि और विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हालांकि, बच्चे की हाइट कम देखकर अपने स्तर पर विटामिन या अन्य सप्लीमेंट शुरू करना उचित नहीं है। डॉक्टर बच्चे के खान-पान, विकास की रफ्तार और अन्य लक्षणों का आकलन करने के बाद ही किसी पोषक तत्व की कमी की जांच या सप्लीमेंट की सलाह देते हैं।
कुछ बीमारियों का संकेत भी हो सकती है धीमी ग्रोथ
अगर बच्चे की लंबाई बढ़ने की रफ्तार लगातार कम हो रही है, तो इसके पीछे कोई स्वास्थ्य समस्या भी हो सकती है। सीलिएक डिजीज, लंबे समय तक रहने वाली आंतों या किडनी की बीमारी, एनीमिया और हड्डियों से जुड़ी कुछ समस्याएं बच्चे के विकास को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके अलावा हाइपोथायरॉइडिज्म और ग्रोथ हार्मोन की कमी जैसी हार्मोन संबंधी परेशानियां भी धीमी ग्रोथ का कारण बन सकती हैं। कुछ मामलों में आनुवंशिक स्थितियां भी बच्चे की लंबाई को प्रभावित करती हैं।
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?
यदि बच्चा लगातार अपनी उम्र के मुकाबले बहुत छोटा है या पहले की तुलना में उसकी ग्रोथ की रफ्तार कम हो गई है, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है। खासतौर पर हाइट कम होने के साथ वजन भी कम हो रहा हो या बच्चे को लंबे समय से पेट दर्द, दस्त, कमजोरी अथवा अत्यधिक थकान जैसी समस्याएं रहती हों, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है।
डॉक्टर आमतौर पर बच्चे की ग्रोथ हिस्ट्री, माता-पिता की लंबाई, जन्म से जुड़ी जानकारी, खान-पान और अन्य लक्षणों का मूल्यांकन करते हैं। जरूरत पड़ने पर कुछ जांचों के जरिए धीमी ग्रोथ के वास्तविक कारण का पता लगाया जाता है।
हर छोटा कद बीमारी नहीं
सबसे जरूरी बात यह है कि कम हाइट को तुरंत किसी बीमारी से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। कई स्वस्थ बच्चों की लंबाई आनुवंशिक कारणों से कम होती है। चिंता का मुख्य कारण तब होता है, जब बच्चे की ग्रोथ की रफ्तार लगातार धीमी हो रही हो या उसके साथ अन्य स्वास्थ्य संबंधी लक्षण भी दिखाई दे रहे हों।
इसलिए बच्चे की लंबाई को लेकर चिंता होने पर खुद से दवा या सप्लीमेंट देने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित और सही तरीका है।
नोट: यह लेख उपलब्ध मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सामान्य जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या बच्चे की ग्रोथ को लेकर चिंता होने पर योग्य चिकित्सक से सलाह लें।
(साभार)

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