गोवा। भारत न्यूज़ बज्ज़ के संपादक कृति शर्मा से उनके गोवा वाले आवास पर भारतीय सिनेमा के मशहूर अभिनेता श्री संपत राज ने शिष्टाचार भेंट की।
श्री संपत राज भारतीय सिनेमा के लोकप्रिय और प्रतिभाशाली अभिनेताओं में शामिल हैं। तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी के लिए पहचाने जाने वाले संपत राज ने खास तौर पर विलेन और महत्वपूर्ण सपोर्टिंग किरदारों के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी भारी आवाज, कड़क व्यक्तित्व और प्रभावशाली स्क्रीन प्रेजेंस उनके अभिनय की खास पहचान मानी जाती है।
शुरुआती जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
श्री संपत राज का जन्म 25 दिसंबर 1968 को लखनऊ, उत्तर प्रदेश में हुआ था। उनके पिता सैन्य डॉक्टर थे और मूल रूप से नेल्लोर, आंध्र प्रदेश के रहने वाले थे, जबकि उनकी मां श्रीरंगम, तमिलनाडु से थीं।

पिता की मिलिट्री पोस्टिंग के कारण संपत राज का बचपन पंजाब, दिल्ली और बेंगलुरु समेत भारत के अलग-अलग हिस्सों में बीता। अलग-अलग राज्यों में रहने के कारण उन्हें कई भाषाओं पर अच्छी पकड़ मिली। अभिनय में रुचि के चलते उन्होंने थिएटर से जुड़कर रंगमंच पर भी काम किया और कई नाटकों में हिस्सा लिया।
फिल्मों में ऐसे शुरू हुआ सफर
श्री संपत राज ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 2003 में कन्नड़ फिल्म ‘प्रीति प्रेमा प्रणया’ से की। इसके बाद 2004 में वे बिम्बा में नजर आए। तमिल सिनेमा में उन्होंने 2004 की फिल्म ‘नेरंजा मनसु’ से कदम रखा, जिसमें उन्होंने नकारात्मक किरदार निभाया।
शुरुआती दौर में उन्हें ज्यादातर विलेन की भूमिकाएं मिलीं, लेकिन उनकी प्रभावशाली अदाकारी ने जल्द ही उन्हें दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक जाना-पहचाना चेहरा बना दिया।

वेंकट प्रभु की फिल्मों से मिली खास पहचान
श्री संपत राज के करियर में निर्देशक वेंकट प्रभु की फिल्मों की भी अहम भूमिका रही। वे वेंकट प्रभु की चर्चित फिल्मों चेन्नई 600028 (2007), सरोजा (2008) और गोवा (2010) में नजर आए।
इन फिल्मों के बाद उनके करियर को नई रफ्तार मिली और वे लगातार बड़ी फिल्मों का हिस्सा बनने लगे।
‘मिर्ची’ में विलेन के किरदार ने दिलाई लोकप्रियता
श्री संपत राज के करियर की चर्चित फिल्मों में प्रभास स्टारर ‘मिर्ची’ (2013) भी शामिल है। फिल्म में उन्होंने ‘उमा’ नाम का नकारात्मक किरदार निभाया था। उनके इस अभिनय को दर्शकों ने काफी पसंद किया। इस भूमिका के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का नंदी पुरस्कार भी मिला।
इससे पहले वे अजीत कुमार की फिल्म ‘मंकाथा’ (2011) में भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आए थे। यह किरदार भी उनके यादगार अभिनय में शामिल है।
इसके अलावा वे महेश बाबू की ‘श्रीमंतूडु’ (2015) जैसी फिल्मों का भी हिस्सा रहे।
विलेन के अलावा सकारात्मक किरदारों में भी दिखाया दम
श्री संपत राज की खासियत यह रही कि उन्होंने खुद को सिर्फ खलनायक की भूमिकाओं तक सीमित नहीं रखा। समय के साथ उन्होंने पुलिस अधिकारी, सख्त पिता, वफादार दोस्त और संवेदनशील पारिवारिक किरदारों को भी पर्दे पर प्रभावी ढंग से निभाया।
2019 की फिल्म ‘जर्सी’ में उन्होंने क्रिकेट कोच ‘गौड़ा’ की सकारात्मक और भावुक भूमिका निभाई। नानी स्टारर इस खेल-आधारित ड्रामा में उनके किरदार को भी दर्शकों ने पसंद किया।
फिल्मों के साथ ओटीटी पर भी सक्रिय
फिल्मों में अपनी पहचान बनाने के बाद संपत राज ने ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी काम किया। वे ‘द वर्डिक्ट’ (2020) और ‘गुड वाइफ’ (2025) जैसी वेब सीरीज में नजर आए।
श्री संपत राज का करियर इस बात की मिसाल है कि एक अभिनेता लंबे समय तक खुद को एक ही तरह के किरदार में सीमित रखे बिना अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए दर्शकों के बीच अपनी पहचान कायम रख सकता है। साल 2026 में भी वे कई बहुभाषी फिल्मों, जिनमें सिग्मा और ब्रेक फास्ट शामिल हैं, में नजर आ रहे हैं।

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