भारतीय सिनेमा में क्षेत्रीय कहानियों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में मराठी फिल्म ‘गोंधल’ एक खास कदम उठाने जा रही है। इस साल के अकादमी पुरस्कारों के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि बनी यह फिल्म 12 नवंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म का ट्रेलर सामने आने के बाद से ही इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। महाराष्ट्र की लोक संस्कृति, पारंपरिक अनुष्ठानों और मनोवैज्ञानिक रोमांच से सजी यह फिल्म दर्शकों को एक रहस्यमयी दुनिया में ले जाने का दावा करती है।
सात भाषाओं में होगी फिल्म की रिलीज
‘गोंधल’ को हिंदी, मराठी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और अंग्रेजी भाषाओं में रिलीज किया जाएगा। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय रिलीज की योजना के तहत इसे भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, दुबई और अफ्रीका समेत कई क्षेत्रों के सिनेमाघरों में प्रदर्शित किया जाएगा।
फिल्म को सात भाषाओं में वैश्विक स्तर पर रिलीज करने का उद्देश्य मराठी सिनेमा की कहानी और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाना है। क्षेत्रीय सिनेमा को व्यापक दर्शक वर्ग से जोड़ने के लिहाज से भी इस पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
रहस्य और रोमांच से भरपूर है ट्रेलर
फिल्म का ट्रेलर इसकी कहानी में छिपे रहस्य और मनोवैज्ञानिक तनाव की झलक पेश करता है। पारंपरिक सांस्कृतिक आयोजन, प्रभावशाली दृश्य और सस्पेंस से भरपूर घटनाक्रम इसकी कहानी को दिलचस्प बनाते हैं। फिल्म में आस्था, पारिवारिक जिम्मेदारियों और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच होने वाले टकराव को भी प्रमुखता से दिखाया गया है।
महाराष्ट्र की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि पर आधारित यह फिल्म सुमन और आनंद राव नाम के नवविवाहित जोड़े की कहानी है। शादी के बाद दोनों की जिंदगी में ऐसी घटनाएं घटने लगती हैं, जो उनके रिश्ते और सोच को प्रभावित करती हैं। एक ओर दुल्हन की इच्छाएं हैं, तो दूसरी ओर पति की जिम्मेदारियां और सामाजिक अपेक्षाएं। इसी बीच रहस्यमयी घटनाओं का सिलसिला शुरू होता है, जो दोनों को उलझाकर रख देता है।
कहानी आगे बढ़ने के साथ वास्तविकता और भ्रम के बीच का अंतर धुंधला होने लगता है। ऐसे में दर्शकों के सामने कई सवाल खड़े होते हैं और रहस्य से पर्दा उठने का इंतजार बना रहता है।
निर्देशक संतोष दावखर ने क्या कहा?
फिल्म के लेखक और निर्देशक संतोष दावखर ने ‘गोंधल’ के जरिए भारतीय संस्कृति के एक ऐसे पहलू को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपेक्षाकृत कम पहचान मिली है।
दावखर के मुताबिक, भारतीय सिनेमा की वैश्विक छवि अक्सर गरीबी और जातिगत संघर्षों पर आधारित कहानियों तक सीमित रह जाती है, जबकि भारत की सांस्कृतिक विविधता और परंपराएं कहीं अधिक व्यापक हैं। उन्होंने कहा कि ‘गोंधल’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही संस्कृति, समुदायों और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है।
निर्देशक ने इस सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचाने को अपने लिए खुशी का विषय बताया है।
क्या है ‘गोंधल’ परंपरा?
‘गोंधल’ महाराष्ट्र की प्राचीन लोक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों से जुड़ा एक सांस्कृतिक आयोजन है। इसमें लोकगीतों, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक मान्यताओं को अभिव्यक्त किया जाता है। इस परंपरा का संबंध विशेष रूप से रात में आयोजित होने वाले अनुष्ठानों से भी रहा है।
फिल्म इसी लोक विरासत को अपनी कहानी का आधार बनाती है और इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति के एक अनूठे रूप को पर्दे पर प्रस्तुत करने का प्रयास करती है। अब दर्शकों की नजर 12 नवंबर को होने वाली इसकी वैश्विक रिलीज पर है।



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