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उत्तर कोरिया का शक्ति प्रदर्शन, पूर्वी समुद्री क्षेत्र में किया बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण

उत्तर कोरिया का शक्ति प्रदर्शन, पूर्वी समुद्री क्षेत्र में किया बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण

जापान ने दक्षिण कोरिया के मिसाइल परीक्षण की कड़ी निंदा की

कोरिया। एशियाई क्षेत्र में एक बार फिर सुरक्षा हालात को लेकर चिंता बढ़ गई है। कोरियाई प्रायद्वीप पर पहले से जारी तनाव के बीच उत्तर कोरिया ने सैन्य शक्ति का प्रदर्शन करते हुए पूर्वी समुद्री क्षेत्र की ओर कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों का प्रक्षेपण किया। इस मिसाइल परीक्षण की पुष्टि दक्षिण कोरिया और जापान, दोनों देशों ने की है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है, जब उत्तर कोरिया में एक अहम राजनीतिक बैठक प्रस्तावित है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर माहौल पहले से ही संवेदनशील बना हुआ है।

दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, उत्तर कोरिया ने राजधानी प्योंगयांग के उत्तर-पूर्वी इलाके से एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जो लगभग 350 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद समुद्र में जा गिरीं। वहीं, जापान के रक्षा मंत्रालय ने जानकारी दी कि दागी गई दो मिसाइलें कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्वी तट के समीप समुद्र में गिरीं।

जापान और दक्षिण कोरिया ने जताई कड़ी आपत्ति

जापान ने उत्तर कोरिया के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए इसे क्षेत्रीय शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बताया है। जापानी सरकार ने कहा कि ऐसे मिसाइल परीक्षण संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों का उल्लंघन हैं। वहीं, दक्षिण कोरिया की सेना ने स्पष्ट किया है कि वह उत्तर कोरिया की किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।

गौरतलब है कि उत्तर कोरिया ने इसी साल जनवरी की शुरुआत में कथित हाइपरसोनिक मिसाइलों का परीक्षण किया था। इससे पहले दिसंबर महीने में उसने लंबी दूरी की रणनीतिक क्रूज मिसाइलों और एक नए एंटी-एयर मिसाइल सिस्टम के परीक्षण का भी दावा किया था। इसके अलावा, हाल ही में उत्तर कोरिया ने अपनी पहली परमाणु-संचालित पनडुब्बी के निर्माण से जुड़ी तस्वीरें भी सार्वजनिक की थीं।

2019 के बाद तेज हुई हथियारों की तैयारी

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, वर्ष 2019 में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के साथ बातचीत ठप होने के बाद से उत्तर कोरिया अपने परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लगातार मजबूत कर रहा है। माना जा रहा है कि उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन हथियारों की ताकत के जरिए अमेरिका पर दबाव बनाकर कूटनीतिक रियायतें हासिल करना चाहते हैं।

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि हालिया मिसाइल परीक्षण सत्तारूढ़ वर्कर्स पार्टी की प्रस्तावित कांग्रेस से पहले सैन्य ताकत दिखाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। यह कांग्रेस फरवरी में होने की संभावना है और पांच साल बाद आयोजित होने वाली यह बैठक उत्तर कोरिया की सबसे अहम राजनीतिक घटनाओं में गिनी जाती है, जिसमें देश की भावी राजनीतिक और आर्थिक दिशा तय की जाती है।

दक्षिण कोरिया पर लगाए गए जासूसी ड्रोन के आरोप

इससे पहले उत्तर कोरिया ने दक्षिण कोरिया पर सीमा के पार जासूसी ड्रोन उड़ाने का आरोप लगाया था। हालांकि, दक्षिण कोरिया ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि सरकार की ओर से ऐसे किसी ड्रोन का संचालन नहीं किया गया। साथ ही यह भी बताया गया कि मामले की जांच की जा रही है कि कहीं ये ड्रोन आम नागरिकों द्वारा तो नहीं उड़ाए गए।

विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन आरोप और मिसाइल परीक्षण, दोनों ही पार्टी कांग्रेस से पहले दक्षिण कोरिया विरोधी माहौल बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि किम जोंग उन द्वारा कोरियाई प्रायद्वीप को लेकर घोषित “दो-राज्य” नीति को पार्टी के संविधान में शामिल किया जा सकता है।

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