Headline
वजन घटाने के लिए चावल छोड़ना कितना सही? आइये जानते हैं क्या कहते हैं विशेषज्ञ
वजन घटाने के लिए चावल छोड़ना कितना सही? आइये जानते हैं क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बढ़ती महंगाई के कारण बढ़ रही लोगों की परेशानियां- मल्लिकार्जुन खरगे
बढ़ती महंगाई के कारण बढ़ रही लोगों की परेशानियां- मल्लिकार्जुन खरगे
‘मां इंटी बंगारम’ ने सिनेमाघरों में दी दस्तक, फिल्म ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर किया इतना कलेक्शन 
‘मां इंटी बंगारम’ ने सिनेमाघरों में दी दस्तक, फिल्म ने पहले दिन बॉक्स ऑफिस पर किया इतना कलेक्शन 
उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है सरकार- सीएम
उत्तराखण्ड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है सरकार- सीएम
त्रिवेणी घाट से गंगा कॉरिडोर तक- अर्द्धकुंभ-2027 की परियोजनाओं पर डीएम ने की विस्तृत समीक्षा
त्रिवेणी घाट से गंगा कॉरिडोर तक- अर्द्धकुंभ-2027 की परियोजनाओं पर डीएम ने की विस्तृत समीक्षा
एमडीडीए की सख्ती- अतुल्यम रिजॉर्ट के पास 10 बीघा में अवैध प्लाटिंग ध्वस्त
एमडीडीए की सख्ती- अतुल्यम रिजॉर्ट के पास 10 बीघा में अवैध प्लाटिंग ध्वस्त
विशेष गहन पुनरीक्षण -2026 की प्रगति पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों संग डीएम/डीईओ की बैठक
विशेष गहन पुनरीक्षण -2026 की प्रगति पर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों संग डीएम/डीईओ की बैठक
हरिद्वार भूमि घोटाले में बड़ा प्रहार, 10 पर मुकदमा, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी की संस्तुति
हरिद्वार भूमि घोटाले में बड़ा प्रहार, 10 पर मुकदमा, पूर्व नगर आयुक्त की बर्खास्तगी की संस्तुति
त्रैमासिक लक्ष्य जल्द IFMS पोर्टल पर करें अपलोड, मुख्य सचिव ने विभागों को दिए निर्देश
त्रैमासिक लक्ष्य जल्द IFMS पोर्टल पर करें अपलोड, मुख्य सचिव ने विभागों को दिए निर्देश

आत्मघाती हमले में तालिबान का टॉप कमांडर रहीमुल्ला हक्कानी मारा गया, आईएसआईएस के खिलाफ काफी मुखर था रहीमुल्ला

[ad_1]

काबुल। काबुल के एक मदरसे में हुए आत्मघाती हमले में तालिबान का टॉप कमांडर रहीमुल्ला हक्कानी मारा गया है। रहीमुल्ला तालिबान के आतंकी विचारधारा का कट्टर समर्थक होने के साथ इस्लामी विद्वान भी था। इस हमले की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी संगठन ने नहीं ली है। हालांकि, तालिबान सूत्रों का कहना है कि इसके पीछे रेजिस्टेंस फोर्स या इस्लामिक स्टेट का हाथ हो सकता है। तालिबान की स्पेशल पुलिस ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है। रहीमुल्ला हक्कानी को अफगानिस्तान के वर्तमान गृहमंत्री और हक्कानी नेटवर्क के सरगना सिराजुद्दीन हक्कानी का वैचारिक गुरु माना जाता है। रहीमुल्ला को सोशल मीडिया पर तालिबान का चेहरा भी माना जाता था। एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस आतंकी के लाखों फॉलोअर्स हैं।

रहीमुल्ला पर पहले भी हो चुके हैं हमले
रहीमुल्ला हक्कानी पाकिस्तान की सीमा से लगे नंगरहार प्रांत के पचिर अव आगम जिले का एक अफगान नागरिक था। हदीस साहित्य के विद्वान कहे जाने वाले हक्कानी ने स्वाबी और अकोरा खट्टक के देवबंदी मदरसों में अपनी धार्मिक शिक्षा प्राप्त की। रहीमुल्ला हक्कानी को मारने के लिए यह तीसरा हमला था। इससे पहले अक्टूबर 2020 में भी रहीमुल्ला को निशाना बनाया गया था, जिसमें वह बाल-बाल बच गया। 2013 में पेशावर के रिंग रोड पर उसके काफिले पर बंदूकधारियों ने अंधाधुंध फायरिंग की थी। उस समय पाकिस्तान पुलिस और सेना के तत्काल जवाबी कार्रवाई से हमलावर भाग गए और रहीमुल्ला की जान बच गई थी।

रहीमुल्ला ने पाकिस्तान में खोला था मदरसा
शेख रहीमुल्ला हक्कानी नंगरहार प्रांत में तालिबान सैन्य आयोग का सदस्य भी रह चुका है। इसे मुठभेड़ के दौरान अमेरिकी सेना ने पकड़ा था, जिसके बाद इसे अफगानिस्तान की बगराम जेल में कई साल तक कैद करके रखा गया। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के पहले वह नौ साल तक पाकिस्तान में रहा। इसने पाकिस्तान के पेशावर में स्थित दीर कॉलोनी में मदरसा जुबैरी की भी स्थापना की। इस मदरसे में अफगान नागरिक और तालिबान लड़ाके धार्मिक शिक्षा ग्रहण करते हैं। इसे पेशावर में तालिबान का एक प्रमुख ठिकाना भी माना जाता है। इस मदरसे के जरिए पूरे पाकिस्तान और विदेशों से तालिबान के लिए चंदा वसूला जाता है। इसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई भी मदद करती है।

आईएसआईएस के खिलाफ काफी मुखर था रहीमुल्ला
हक्कानी सलाफी और इस्लामिक स्टेट से संबद्ध विचारधारा के खिलाफ काफी मुखर रहा। माना जाता है कि इसी कारण वह अपने विरोधियों के निशाने पर आ गया। शेख रहीमुल्लाह हक्कानी ने मदरसे की आड़ में अपना फेसबुक और यूट्यूब चौनल भी शुरू किया। अफगान मौलवी को अफगानिस्तान और पाकिस्तान में लोकप्रियता हासिल है। फ़ेसबुक पेज और यूट्यूब चौनल में हदीस साहित्य और देवबंदी और हनफ़ी विचारधारा से जुड़े धार्मिक मुद्दों पर बोलने वाले अफगान मौलवी के कई वीडियो हैं।

तालिबान के लिए कितना बड़ा झटका
शेख रहीमुल्ला हक्कानी की हत्या हक्कानी नेटवर्क के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। रहीमुल्ला हक्कानी नेटवर्क का वैचारिक चेहरा था। वह अफगानिस्तान समेत पूरे अरब मुल्कों में हक्कानी नेटवर्क का प्रतिनिधित्व करता था। ऐसे में सिराजुद्दीन हक्कानी के गृहमंत्री रहते राजधानी काबुल में हुई इस हत्या ने तालिबान की इस्लामिक अमीरात सरकार को हिला दिया है। यह हमला बताता है कि काबुल में भी तालिबान की पकड़ ढीली पड़ती जा रही है। तालिबान इन दिनों अपनी सरकार को मान्यता दिलवाने के प्रयास में जुटा है। जिसमें रहीमुल्ला की भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। दूसरा, तालिबान को विदेशों और पाकिस्तान से मिलने वाली फंडिंग पर भी इस आतंकी की मौत का असर पड़ सकता है।



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top