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उत्तराखंड पेयजल निगम की कार्यशैली फिर उठे सवाल?निगम अपने चहेते अधिकारियों पर मेहरबान

देहरादून। उत्तराखंड पेयजल निगम की कार्यशैली में हमेशा सवाल उठते रहे है। निगम के उच्च मठाधीश, चाहे प्रबन्ध निदेशक हों या उनके सिपाह-सालार, हमेशा अपने चहेते अधिकारियों पर मेहरबान रहकर नियम विरुद्ध कार्य करते रहे है। चाहे वो डीपीसी का मामला हो या ट्रांसफर का। ताजा मामला उत्तराखंड पेयजल निगम की निर्माण इकाई चंबा का है।इस इकाई में टिहरी और उत्तरकाशी दो जिले आते है। इन दो जिलों में जो भी निर्माण कार्य पेयजल निगम को मिलते है, उसका जिम्मा चंबा इकाई का होता है।

लेकिन उत्तराखंड पेयजल निगम के मठाधीश, प्रबन्ध निदेशक उदयराज सिंह ने अपने चहेते अधिकारियों और राजनीतिक धौंस दिखाने वालों को लाभ पहुंचाने के लिए चम्बा इकाई के कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले निर्माण कार्यों को नियम विरुद्ध जाकर अपने मुख्यालय की निर्माण इकाई को सौंप दिया है। मजेदार बात यह है कि यह निर्माण इकाई मुख्यालय स्वीकृत ढांचे में भी कोई इकाई या कार्यालय नहीं है इस इकाई में परियोजना प्रबंधक बनाई गई कुमारी लिपिका का मुनिकीरेती से मात्र एक माह में ही देहरादून, सुगम से सुगम ट्रांसफर कर दिया गया।

हालत यह हो गए हैं कि पूरी नौकरी देहरादून में करने के बाद कोई अधिकारी देहरादून से ऋषिकेश जाने में भी अपनी तौहीन समझ रहा है और इन्होंने अपनी मर्जी के अनुसार राजनीतिक दबाव के दम पर और अपनी इच्छा से 1 माह की अवधि में ही अपना स्थानांतरण  मुनि की रेती से वापस देहरादून कराकर निगम प्रबंधन को अपनी ताकत दिखा दी है।
अब यह पता नहीं कि यहां लिपिका की राजनीतिक ताकत है या फिर प्रबंधन के साथ मिलीभगत का कमाल है।
सवाल ये उठता है की जब उत्तरकाशी और टिहरी जिलों में होने वाले निर्माण कार्य चंबा इकाई के कार्यक्षेत्र में आते है तो इन दो जिलों में होने वाले निर्माण कार्य चंबा इकाई को न देकर पेयजल निगम की मुख्यालय इकाई को क्यूँ दिए जा रहे है?

हाल ही में उत्तराखंड पेयजल निगम के मठाधीशों ने मुख्यालय में अस्थाई पेयजल निगम निर्माण इकाई का एक नया डिविजन बनाया। प्रबंध निदेशक ने कुमारी लिपिका को परियोजना प्रबंधक बनाकर अपने चहेते जयंक पांडे को सहायक अभियंता के रूप में इस डिविजन का जिम्मा दिया। जबकि मजेदार बात यह है कि लगभग 60 से अधिक अभियंता इनसे सीनियर है और अभी जेई के पद पर ही कार्य कर रहे हैं।

सूत्रों के हवाले से ये भी खबर है कि पेयजल निगम के मठाधीशों ने अपने चहेते अधिकारियों पर मेहरबानी दिखाते हुए इस अस्थाई डिविजन को उत्तरकाशी,टिहरी और अल्मोड़ा में होने वाले निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी दी जा रही है।अब सवाल ये उठता है कि जब इन क्षेत्रों में पेयजल निगम की निर्माण पहले से मौजूद है तो फिर यहां के निर्माण कार्य अस्थाई डिविजन को क्यूँ दिए जा रहे है?

चंबा अल्मोड़ा और टिहरी में भी निर्माण इकाई मुख्यालय को ढांचे में स्वीकृत ना होने के बावजूद कामों का जिम्मा सौंपना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

मजेदार बात यह भी है कि इस मुख्यालय निर्माण इकाई के लिए अलग से टी0ए0सी0 सेल का गठन किया गया है जबकि पेयजल निगम में पहले से ही सभी डिवीजन और कार्यालयों के लिए एक ही टी0ए0सी0 सेल का गठन है।इस प्रकार यदि प्रत्येक डिवीजन और कार्यालय के लिए अलग-अलग टी0ए0सी0 सेल स्थापित की जाएंगी तो लगता है जल निगम में टी0ए0सी0 सेल का भी अर्धशतक पूरा करना पड़ेगा।

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