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उत्तराखंड शासन कम खर्च को लेकर अधिकारियों को दे रही है नसीहत,किराए के भवन में चल रहे कई सरकारी विभाग, हर साल लाखों किराया

देहरादून।उत्तराखंड सरकार और उसके सरकारी सिस्टम का ही खेल है कि आज प्रदेश 70 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के कर्ज तले दबा हुआ है।कहा जा रहा है कि किराए के रूप में सरकार को भारी रकम चुकानी पड़ रही है।प्रदेश में ये स्थिति तब है जब सरकार कम खर्च को लेकर अधिकारियों को नसीहत देती रही है, लेकिन अधिकारी है कि अपने निजी फायदे के लिए सरकारी पैसे की बंदरबांट करने से बाज नहीं आ रहे है। जब सरकारी भवन मौजूद है तो प्राइवेट भवनों में सरकारी दफ्तरों को शिफ्ट करने का औचित्य नहीं बनता। यह भ्रष्टाचार का एक बड़ा जरिया बनता दिखाई दे रहा है, जहां सरकारी भवन होने के बावजूद लाखों रुपए किराया चुका कर उन्हें वहां से संचालित किया जा रहा है।

उत्तराखंड मे कई ऐसे विभाग हैं जिन विभागों का अपना सरकारी बिल्डिंग होते हुए भी वो किराये की बिल्डिंग से कार्यालय चला रहे है।ऊर्जा निगम और उत्तराखंड पेयजल निगम के कई कार्यालय प्राइवेट की बिल्डिंग में चल रहे है जिनका की मकान मालिकों को भारी-भरकम किराया दिया जाता है।बात करें ऊर्जा निगम की तो आराघर में बिजली विभाग का बहुत बड़ा दफ्तर है लेकिन ऊर्जा निगम अधिशासी अभियंता ग्रामीण रायपुर का कार्यालय 20 सालों से किराया की बिल्डिंग में है जिसका की भारी-भरकम किराया मकान मालिक को दिया जाता है।ऐसे ही पेयजल निगम के कई कार्यालय ऐसे है जो किराए के मकानों में चल रहे है।आज भी इन विभागों के ज्यादातर कार्यालय किराये के मकानों में ही चल रहे हैं। इससे प्रति माह तीस से पैंतीस हजार रुपये किराये में जा रहे हैं।

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