Headline
देहरादून में कुष्ठ रोग मुक्त लाभार्थियों की हुई निःशुल्क स्वास्थ्य जांच
देहरादून में कुष्ठ रोग मुक्त लाभार्थियों की हुई निःशुल्क स्वास्थ्य जांच
एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक
एसआईआर को लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन पर यमकेश्वर शिव मंदिर में होगा रुद्राभिषेक व यज्ञ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जन्मदिन पर यमकेश्वर शिव मंदिर में होगा रुद्राभिषेक व यज्ञ
वजन घटाने के लिए कर रहे हैं इंटरमिटेंट फास्टिंग? पहले जान लें इसके फायदे और नुकसान
वजन घटाने के लिए कर रहे हैं इंटरमिटेंट फास्टिंग? पहले जान लें इसके फायदे और नुकसान
बांग्लादेश में अवामी लीग के 7 बड़े नेताओं को फांसी की सजा
बांग्लादेश में अवामी लीग के 7 बड़े नेताओं को फांसी की सजा
तमिलनाडु में सीएम विजय की टिप्पणी को लेकर विवाद, डीएमके के ए राजा समेत तीन नेताओं पर केस
तमिलनाडु में सीएम विजय की टिप्पणी को लेकर विवाद, डीएमके के ए राजा समेत तीन नेताओं पर केस
पटना में छात्रों का प्रदर्शन, अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे अभ्यर्थी
पटना में छात्रों का प्रदर्शन, अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे अभ्यर्थी
मुख्यमंत्री धामी ने की चारधाम यात्रा-2026 की व्यवस्थाओं की समीक्षा
मुख्यमंत्री धामी ने की चारधाम यात्रा-2026 की व्यवस्थाओं की समीक्षा
पुरानी पेंशन प्रकरण को लेकर मातृ-शिशु एवं कल्याण संगठन का शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिला
पुरानी पेंशन प्रकरण को लेकर मातृ-शिशु एवं कल्याण संगठन का शिष्टमंडल मुख्यमंत्री से मिला

ऊर्जा निगम को लग रही है लाखों की चपत,विभाग और अधिकारी हुए लापरवाह

देहरादून।दून शहर में तीन हजार से ज्यादा ई-रिक्शा हैं, मगर इनके लिए चार्जिंग स्टेशन एक भी नहीं है। एक ई-रिक्शा को चार्ज करने में लगभग नौ यूनिट बिजली की खपत होती है। इस लिहाज से हर रोज आमजन के हिस्से की करीब 27 हजार यूनिट घरेलू बिजली ई-रिक्शा की चार्जिंग में खप रही है। ई-रिक्शा की बैटरी को घरेलू की बजाय व्यावसायिक बिजली से चार्ज किया जाना चाहिए, मगर दून में ई-रिक्शा की बैटरी अवैध रूप से घरेलू बिजली से चार्ज की जा रही है। घरेलू बिजली का मूल्य 4.20 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि व्यावसायिक बिजली 5.80 रुपये प्रति यूनिट मिल रही है। इस तरह एक साल में तीन हजार ई-रिक्शा को चार्ज करने में 98 लाख 55 हजार यूनिट बिजली खर्च होने का अनुमान है।

इतनी बिजली की खपत होने पर ऊर्जा निगम को व्यावसायिक बिजली के हिसाब से लगभग 5.71 करोड़ रुपये राजस्व में मिलते वहीं दूसरी ओर ई-रिक्शा को चार्ज करने में घरेलू बिजली का उपयोग किए जाने से ऊर्जा निगम को सालाना 4.13 करोड़ रुपये ही मिल रहे हैं। इस लिहाज से ऊर्जा निगम को हर वर्ष डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो रहा है। एक ओर प्रदेश सरकार प्रदूषण रहित वाहनों के संचालन पर जोर दे रही है और इसके तहत बैटरी चलित वाहन (इलेक्ट्रिक व्हीकल) को राज्य सरकार प्रोत्साहित कर रही है मगर हैरानी की बात तो यह है कि इनकी चार्जिंग के लिए अभी राज्य में कोई चार्जिंग स्टेशन नहीं है। हालांकि, परिवहन विभाग ने शहर में चार्जिंग स्टेशन बनाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसके लिए कुल 12 स्थान चिह्नित किए गए हैं। वहीं इस मामले में आरटीओ प्रवर्तन सुनील शर्मा का कहना है कि ई-रिक्शा की चार्जिंग के लिए रिक्शा चालकों को व्यावसायिक बिजली का कनेक्शन लेना होता है। घरेलू बिजली से व्यावसायिक वाहनों की चार्जिंग नहीं की जा सकती। परिवहन विभाग इसकी सख्त जांच करेगा।

प्रदेश की राजधानी देहरादून में वैसे तो विकास के कई बड़े दावे किए गए हैं मगर धरातल की सच्चाई कुछ और ही बयां करती है। यहां बिना नीति सड़क पर दौड़ रहे ई-रिक्शा घरेलू बिजली का गैर कानूनी रूप से व्यावसायिक उपयोग कर हर महीने सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की चपत भी लगा रहे हैं।अब आप पॉवर गेम यानी बिजली का खेल समझिए। देहरादून में वादा किया गया था कि कई स्थानों पर चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएंगे मगर कई स्थान तो छोड़िए देहरादून में अब तक एक भी चार्जिंग स्टेशन नहीं लग पाया है। ऐसे में यह रिक्शे घरेलू बिजली से रिक्शा चार्ज करते हैं और हर महीने इसका नुकसान सरकार को झेलना पड़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top