Headline
वंदे मातरम् के आधे-अधूरे गायन का निर्णय देश की भावनाओं और शहीदों के बलिदान का अपमान: सीएम धामी 
वंदे मातरम् के आधे-अधूरे गायन का निर्णय देश की भावनाओं और शहीदों के बलिदान का अपमान: सीएम धामी 
पिंडर घाटी के दुर्गम क्षेत्रों में डीएम अपूर्वा पाण्डे का स्थलीय निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश
पिंडर घाटी के दुर्गम क्षेत्रों में डीएम अपूर्वा पाण्डे का स्थलीय निरीक्षण, व्यवस्थाओं में सुधार के निर्देश
मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन
मियांवाला स्थित जौहड़ की भूमि का 8.63 करोड़ की लागत से सौंदर्यीकरण, पुराने जलस्रोत को मिला नया जीवन
चमोली में पीआईबी का ‘वार्तालाप’ एवं क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला कार्यक्रम आयोजित
चमोली में पीआईबी का ‘वार्तालाप’ एवं क्षेत्रीय मीडिया कार्यशाला कार्यक्रम आयोजित
गौहरी माफी में सौंग नदी का बढ़ता कटाव बना चुनौती, स्थायी समाधान पर जोर
गौहरी माफी में सौंग नदी का बढ़ता कटाव बना चुनौती, स्थायी समाधान पर जोर
लोनिवि मंत्री महाराज ने परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की बैठक में रखे कई सुझाव
लोनिवि मंत्री महाराज ने परिवहन एवं राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय की बैठक में रखे कई सुझाव
कुंभ मेला-2027 की सुरक्षा होगी हाईटेक, AI और आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा आपदा प्रबंधन
कुंभ मेला-2027 की सुरक्षा होगी हाईटेक, AI और आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा आपदा प्रबंधन
डीडीआरसी केंद्र का सचिव समाज कल्याण ने किया निरीक्षण, दिव्यांगजनों को समयबद्ध सेवाएं देने के निर्देश
डीडीआरसी केंद्र का सचिव समाज कल्याण ने किया निरीक्षण, दिव्यांगजनों को समयबद्ध सेवाएं देने के निर्देश
जिला चिकित्सालय चंपावत में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का लोकार्पण
जिला चिकित्सालय चंपावत में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट का लोकार्पण

पहाड़ों पर नहीं चढ़ना चाहते हैं उत्तराखंड पेयजल निगम के अधिशासी अभियंता

देहरादून। हे!भगवान, उत्तराखंड में यह क्या हो रहा है। पहाड़ की राजधानी पहाड़ में हो, इस संकल्प के साथ सरकार गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर चुकी है, लेकिन अफसरों का मोह देहरादून, हरिद्वार, यूएसनगर और नैनीताल से नहीं छूट पा रहा है। सरकार की सोच है कि अधिकारी पहाड़ों में रहेंगे तो वहां का दर्द समझ सकेंगे और उसके अनुरुप विकास को तकनीकी के साथ जोड़कर आगे बढ़ाएंगे, लेकिन हो तो रहा है इसके ठीक उलट। पेयजल निगम में एक ऐसा मामला सामने आया है, जो सरकार के सपनों को आइना दिखा रहा है।जी हां, हम बात कर रह हैं उत्तराखंड पेयजल निगम की। बता दें कि पेयजल विभाग सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक है। निगम के पास राज्य ही नहीं केंद्र सरकार की भी कई महत्वकांक्षी योजनाओं के संचालन का जिम्मा है।

अधिकारी-कर्मचारियों को पहाड़ चढ़ाने की कवायद रंग नहीं ला रही है। जिससे दुर्गम क्षेत्रों की व्यवस्थाएं अभी पटरी पर नहीं आ सकी हैं।यह बुरा हाल उत्तराखंड पेयजल निगम का है। अधिकारी पहाड़ चढ़ने को राजी नहीं हैं।ताज़ा मामला उत्तराखंड पेयजल निगम का है।उत्तराखंड पेयजल निगम(गंगा) गोपेश्वर में किसी भी अधिशासी अभियंता की तैनाती नही हुई है।हाल ही में उत्तराखंड पेयजल निगम में 18 सहायक अभियंताओं को अधिशासी अभियंता में प्रमोशन हुआ था।इन अभियंताओं में किसी भी अभियंता की पेयजल निगम (गोपेश्वर) में तैनाती नही की गई।

विभागीय सूत्रों के हवाले से खबर है। इन 18 अधिशासी अभियंता से एक अभियंता की पेयजल निगम श्रीनगर डिविजन में तैनाती के आदेश जारी हुए थे।लेकिन इस अधिशासी अभियंता ने 25 दिन बीत जाने के बाद भी श्रीनगर के डिवीजन में जॉइनिंग नहीं की है।ये अभियंता आज कल शासन के चक्कर काट रहा है और देहरादून के ही एक डिवीजन में तैनाती के लिए सेटिंग-गेटिंग कर रहा है।विभागाध्यक्षों को भी ऐसे अफसरों के कार्य दायित्व के प्रति कड़ी निगरानी रख कर नकेल कसने की आवश्यकता है, ताकि दूसरे अफसरों के लिए यह नजीर बन सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top