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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मूल मंत्र, ‘न थकना है, न रुकना है, ना झुकना है ना मिटना है मंजिल तक पहुंचना है‘, पढ़िए यह स्पेशल स्टोरी

पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ में अल सुबह दुकान में आम लोगों के साथ चाय की चुस्की के साथ फीड बैक लेना हो या रुद्रप्रयाग में दुकानदार से बिना लाव-लश्कर से मिलना। एक सच्चे जनसेवक के तौर पर पहचान बना रहे सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कई राजनीतिक मिथकों को तोड़ने का काम किया है। उनका जुनून, कुछ कर गुजरने की चाहत और निरंतर गतिविधियों से प्रदेश तेजी से विकास के पथ पर अग्रसरित हो रहा है। इस अथक मेहनत के पीछे एक सपने को साकार करने की इच्छा है कि उत्तराखंड को सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाना है।

ना रुकना है, ना थकना है ना झुकना है ना मिटना है राज्य के विकास, संस्कृति और विजन के लिए नए आयाम स्थापित करने हैं। प्रदेश के मुखिया के तौर पर धामी ने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। वह जनता के हर सुख दुख में साथ हैं। आपदा के समय उत्तरकाशी का द्रोपदी का डांडा एवलांच हो या पौड़ी का बस हादसा, हर जगह खुद पहुंचते हैं। राहत और बचाव कार्यों की कमान खुद ही संभाल लेते हैं, इसका परिणाम होता है कि कहीं कोई ढिलाई या लापरवाही नहीं होती। अपने छोट से कार्यकाल में सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक बेहद संवेदनशील, सहृदयी और जननायक के तौर पर पहचान बनाई है। 4 जुलाई 2021 को मुख्य सेवक की शपथ लेते हुए एक युवा नेता के हाथ में देश के प्रधानमंत्री ने कमान सौंपी थी जिसे चरितार्थ कर रहे मुख्य सेवक पुष्कर सिंह धामी।

सुबह रुद्रप्रयाग, फिर गौचर चमोली उसके बाद जौलजीबी पिथौरागढ़, शाम को बच्चों के कार्यक्रम देहरादून में प्रतिभाग उसके बाद फाइलों का ढेर। ऐसे ही दिनचर्या है युवा मुख्यमंत्री की। हर कार्यक्रम में नई ऊर्जा, नये जोश के साथ लोगों से घुलना मिलना। जिस उमंग और उत्साह से विभिन्न कार्यक्रमों में स्थानीय जनता मुख्यमंत्री की राह देखती है, उसे युवा मुख्यमंत्री निराश नहीं होने देते, ऐसे ही कार्यशैली है पुष्कर सिंह धामी की।

एक ही दिन में उत्तराखंड के विभिन्न जिलों में मौसम खराब होने के बावजूद अपनी दमदार उपस्थिति आखिर कैसे दर्ज करा लेते हैं मुख्यमंत्री? सुबह 5 बजे उठकर रात 12 बजे तक कार्य करने की उनकी शैली उत्तराखंड को आगे बढ़ाने की सोच और कल्पना को साकार करते हुए दिखती है। यही सोच और कार्य करने की शैली से प्रभावित देश के प्रधानमंत्री ने यूं ही नही कहा कि आने वाला दशक उत्तराखंड का होगा। अपने यही विजन से मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री जी से देश के आखिरी गांव माणा को देश का पहला गांव घोषित कराया। मोदी जी की कार्य शैली अपनाते हुए युवा मुख्यमंत्री उनसे प्रेरणा लेते हुए जिस तरह उनके पद चिन्हों पर चलकर निरंतर कार्य कर रहे हैं उससे उत्तराखंड के लोगों में एक नई आशा की किरण जागी है निरंतर राजनीतिक अस्थिरताओं का शिकार रहा उत्तराखंड युवा मुख्यमंत्री के रूप में एक स्थिर राजनीति के साथ एक सर्वश्रेष्ठ राज्य बनने की ओर निरंतर अग्रसर हो रहा है।

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