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हिमाचल, दिल्ली के बाद अब गुजरात विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगी धामी की धमक, केंद्रीय नेतृत्व की हर कसौटी पर खरे उतरते सीएम धामी

देहरादून। हिमाचल प्रदेश के विधानसभा और दिल्ली के एमसीडी चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी गुजरात विधानसभा चुनाव में प्रचार करने जाएंगे। राष्ट्रीय महामंत्री संगठन तरुण चुग ने इस बाबत उन्हें अनुरोध पत्र भेजा है। सीएम धामी ने पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए जमकर चुनाव प्रचार किया था। रविवार को वह दिल्ली के एमसीडी चुनाव में प्रचार के लिए गए थे। उन्होंने वहां रोड शो किए। अब सीएम धामी गुजरात के विस चुनाव में जाएंगे। गुजरात में 22 नवंबर को कारपेट बाम्बिंग कार्यक्रम होना है। इस संबंध में राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुग ने सीएम धामी की सहमति मांगी है।

सधे कदमों से आगे बढ़ रहे धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में पुष्कर सिंह धामी अब तक के कार्यकाल में वह सधे कदमों से आगे बढ़ते दिखे हैं। इस अवधि में उन्होंने सरकार और संगठन में बेहतर तालमेल पर जोर दिया तो सरकार को समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक ले जाने का इरादा जताया। अब उनके सामने भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व और राज्य की जनता के भरोसे पर खरा उतरने की चुनौती है। उन्होंने उत्तराखंड की स्थापना के 25 वर्ष पूर्ण होने पर राज्य को देश के सर्वश्रेष्ठ राज्यों की श्रेणी में लाने का संकल्प लिया है। इसमें उनके कौशल की परीक्षा होनी है।

मार्च 2017 में प्रचंड बहुमत से सत्तासीन हुई भाजपा सरकार में पिछले वर्ष दो बार नेतृत्व परिवर्तन हुआ। चार साल पूरे करने से कुछ दिन पहले ही पार्टी नेतृत्व ने त्रिवेंद्र सिंह रावत के स्थान पर लोकसभा में पौड़ी गढ़वाल सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे तीरथ सिंह रावत को मुख्यमंत्री बनाया। तीरथ सिंह रावत का कार्यकाल अल्प रहा और फिर पार्टी नेतृत्व ने दूसरी बार के विधायक पुष्कर सिंह धामी को राज्य की कमान सौंप दी। धामी ने चार जुलाई 2021 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद वह स्वयं को साबित करने में सफल रहे।

यद्यपि, पहले कार्यकाल में धामी को भी कार्य करने को समय बहुत कम मिला, क्योंकि लगभग तीन माह का समय तो विधानसभा चुनाव और आचार संहिता में ही निकल गया। बावजूद इसके पहले कार्यकाल में धामी ने युवाओं पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही एक के बाद एक निर्णय लेकर सबका ध्यान खींचा। यही कारण रहा कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने चुनाव में उन्हें चेहरा बनाया। साथ ही पार्टी ने युवा मुख्यमंत्री, युवा उत्तराखंड का नारा दिया। विधानसभा चुनाव में धामी के कौशल की परीक्षा होनी थी, जिसमें वह सफल रहे। यद्यपि, इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करिश्माई व्यक्तित्व की रही, लेकिन चेहरा तो धामी ही थे। यह बात अलग है कि धामी स्वयं खटीमा सीट से चुनाव हार गए, लेकिन भाजपा दो-तिहाई बहुमत हासिल करने में सफल रही। इसके साथ ही राज्य में हर पांच साल में सत्ताधारी दल बदलने का मिथक भी टूटा। उनकी मेहनत को ध्यान में रखते हुए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने दोबारा धामी पर ही विश्वास व्यक्त करते हुए उन्हें राज्य की कमान सौंप दी। 23 मार्च को धामी ने दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली और हाल ही में उनकी सरकार सौ दिन का कार्यकाल पूरा कर चुकी है।

चम्पावत सीट से उपचुनाव रिकार्ड मतों से जीतने के बाद से तो मुख्यमंत्री आत्मविश्वास से भरे हुए हैं। सधे हुए कदमों से वह विधानसभा चुनाव के दृष्टिपत्र में जनता से किए गए वायदों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए ड्राफ्ट तैयार करने को विशेषज्ञ कमेटी का गठन इसी कड़ी का हिस्सा है। इसके अलावा कुमाऊं क्षेत्र के मंदिरों के लिए मानस खंड योजना, विभिन्न पेंशन योजनाओं में धनराशि में बढ़ोतरी समेत अन्य निर्णय इसका उदाहरण हैं। अब उनके सामने राज्य को विकास के पथ पर अग्रसर करने की चुनौती रहेगी।

निकाय व लोस चुनावों में होगी परीक्षा
मुख्यमंत्री धामी की पहली परीक्षा अगले साल होने वाले नगर निकाय चुनावों में होगी। वर्तमान में नगर निकायों में भाजपा का वर्चस्व है, जिसे बरकरार रखने की चुनौती उनके सामने होगी। इसे वर्ष 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए धरातल तैयार करने से भी जोड़कर देखा जाएगा। राज्य में लोकसभा की पांच सीटें हैं, जिनमें वर्ष 2014 से भाजपा काबिज है। अब लोकसभा चुनाव में राज्य से हैट्रिक बनाने की चुनौती होगी।

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