ऋषिकेश दौरे पर सीएम धामी को सराहा तो धन दा के बर्थडे का जिक्र कर चौंका गए
अविकल थपलियाल/अविकल उत्त्तराखण्ड
ऋषिकेश। पीएम मोदी भी जानते हैं कि हमेशा किसी न किसी मुद्दे पर सुर्खियों में रहने वाले हरक सिंह अपनी हनक में लिए भी जाने जाते हैं। पीएम मोदी जब जॉलीग्रांट हवाई अड्डे पर उतरे तो उनके स्वागत में कतारबद्ध खड़े भाजपा नेताओं में हरक को देख उनकी हनक पर टिप्पणी कर गए।

पीएम मोदी ने कैबिनेट मंत्री हरक सिंह को उनके टिपिकल अंदाज पर ही सवाल दाग दिया। मंत्री हरक के कंधे पर हाथ धर पूछ ही लिया-कहिए हरक सिंह जी कैसी चल रही आपकी हनक।
देखते ही देखते पीएम मोदी की हरक सिंह से की गई यह क्षणिक चुहल से जुड़ी फोटो सोशल मीडिया पर वॉयरल हो गयी। दरअसल, उत्त्तराखण्ड गठन के इन 21 वर्षों में हरक सिंह के नाम के साथ जुड़ी कई राजनीतिक व निजी कहानियां भी आकार लेती गई।
लेकिन 2016 का साल काफी उथल पुथल से भरपूर रहा। कांग्रेस के अंदर हुए राजनीतिक विस्फोट के मुख्य सूत्रधार हरक सिंह को ही माना गया। कांग्रेस में हुआ बड़ा विभाजन हरक सिंह बनाम हरीश रावत के खुले द्वंद्व के बाद ही सामने आया। और कांग्रेस की यही टूट मोदी-अमित शाह की राजनीतिक गणित को और भी पंख लगा गया।
इधर, 2017 से लेकर आज तक हरक सिंह बनाम त्रिवेंद्र रावत बनाम शमशेर सिंह सत्याल की जंग भी दिल्ली से लेकर उत्त्तराखण्ड के राजनीतिक गलियारों की सुर्खियां बनी रही। इस जंग में त्रिवेंद्र सिंह रावत व सत्याल अपनी मजबूत कुर्सी से हाथ धो बैठे। त्रिवेंद्र के राज में हरक सिंह के श्रम विभाग के अधीन रहे कर्मकार कल्याण बोर्ड के घपले की भी खूब चर्चा हुई। मंत्री हरक सिंह से कर्मकार कल्याण बोर्ड की जिम्मेदारी छीन तत्कालीन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने होने का अहसास भी कराया। दोनों के बीच खूब मुंहजबानी तीर भी चले।

उस समय मंत्री हरक सिंह ने एक बड़ा बयान भी दिया कि वो अभिमन्यु नहीं हैं जो चक्रव्यूह के आखिरी द्वार पर मारे जाएं। त्रिवेंद्र काल में हाशिये ओर धकेल दिए गए हरक का यह बयान उनकी हनक की तस्वीर दिखा गया। और त्रिवेंद्र के तख्ता पलट में हरक टीम अपनी भूमिका बखूबी निभा गई।
त्रिवेंद्र के “शिकार” के बाद हरक सिंह ने कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल को हटाने में दून से लेकर दिल्ली तक ऐड़ी चोटी का जोर लगा दिया। बीते दिनों दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह से हुई लंबी मुलाकात के बाद हरक सिंह ने हाल ही में त्रिवेंद्र के करीबी शमशेर सिंह सत्याल को भी कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद से चलता कर दिया।
विदायी की यह पटकथा लिखने के दौरान ढैंचा बीज घोटाले पर पूर्व कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को बचाने की बात कहकर भी सनसनी मचा दी थी। यही नहीं, हाल ही में अचानक ढैंचा बीज घोटाले में त्रिपाठी आयोग की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए यह भी कह गए कि तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने त्रिवेंद्र रावत को न बख्शने की सलाह दी थी। साथ ही दो वरिष्ठ भाजपा नेताओं को भी जिक्र कर गए थे जिन्होंने त्रिवेंद्र पर कोई एक्शन नहीं लेने की बात कही थी। लेकिन उन्होंने ढैंचा बीज घोटाले में त्रिवेंद्र के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। हरक के अब किये गये इस खुलासे के बाद हरीश रावत के बयानों से भाजपा समेत कांग्रेस में कुछ दिन तक राजनीतिक बवंडर उठता-थमता रहा।
राज्य गठन से पहले अपनी राजनीतिक यात्रा भाजपा से शुरू करने वाले हरक सिंह 1991 में कल्याण कैबिनेट के हिस्सा बने। बाद में मायावती की बसपा में रहते हुए रुद्रप्रयाग जिले के निर्माण में विशेष भूमिका भी निभाई। बसपा से अलग होने के बाद हरक सिंह ने एक राजनीतिक मोर्चा भी बनाया। सन 2000 से पहले भाजपा में रहते हुए ज्वाल्पा धाम में आयोजित पार्टी कार्यक्रम में हुए हंगामे में भी सुर्खियां बटोरी। गढ़वाल विवि के कुलपति से जबरदस्त विवाद के भी केंद्र बिंदु रहे। इन घपलों की वजह से जेल भी गए। राज्य आंदोलन में भी भाजपा नेता के तौर पर शिरकत की। पुलिस से भिड़े।

2016 तक कांग्रेस में रहते हुए हरक सिंह कभी जैनी कांड तो कभी मंत्री नहीं बनने को लेकर मां धारी देवी की कसम खाकर सुर्खियों में रह चुके हैं। इसी बयान के बाद 2012 में तत्कालीन सीएम विजय बहुगुणा की कैबिनेट में लंबे समय शपथ नहीं लेना और फिर बाद में मंत्री बनने को तैयार होना। 1989 से लेकर 2017 तक विभिन्न विधानसभाओं से चुनाव लड़ना और 2000 के बाद तो लगातार जीत हासिल करते रहना भी हरक सिंह के राजनीतिक सफर में एक और अध्याय जोड़ता है।
इधर, नवरात्र के पहले दिन उत्त्तराखण्ड पधारे पीएम मोदी की टिप्पणी के बाद हरक सिंह की हनक से जुड़ी ऐसी कई बेपर्दा व ढकी छिपी कहानियां एकबारगी फिर चलचित्र की तरह घूम गई।
पीएम मोदी ने अपनी इस यात्रा में सीएम पुष्कर सिंह धामी को मित्र ,उत्साही व ऊर्जावान के विशेषण से नवाज व स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत के जन्मदिन को मंच से याद करते हुए मीडिया व राजनीतिक हलकों को लिखने व चर्चा के लिए काफी मसाला भी मुहैया करा गए लेकिन हरक की हनक का जिक्र कर राजनीति की दाल में पहाड़ी हींग का जबरदस्त तड़का मार उत्त्तराखण्ड की राजनीति में अलग तरह की “खुशबू ” भी बिखेर गये …
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