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उत्तराखंड में अपने चरम पर पहुंची कांवड़ यात्रा, हर किसी की जुबां से हर हर महादेव और बोल बम के नारों की गूंज, हरिद्वार से 35 लाख कांवड़िये हुए रवाना

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देहरादून। उत्तराखंड में श्रावण मास की कांवड़ यात्रा अब अपने चरम पर पहुंच गई है। धर्मनगरी की हर गली और हर सड़क पर केसरिया रंग के वस्त्र पहने कांवड़िए ही नजर आ रहे हैं। 14 जुलाई को कांवड़ यात्रा शुरू हो गई थी। यात्रा शुरू होते ही पंचक लग गए थे, इसलिए बड़ी संख्या में शिवभक्त नहीं पहुंच रहे थे। 20 जुलाई की दोपहर को पंचक खत्म हो गए। इसके साथ ही अब कांवड़ यात्रा अपने शबाब पर पहुंच गई है। बाहरी प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं का लगातार क्रम बना हुआ है। दिन-रात लगातार लाखों कांवड़िए यहां पहुंच रहे हैं और उतने ही वापसी भी कर रहे हैं। हरकी पैड़ी समेत सभी प्रमुख घाटों पर हर समय लाखों श्रद्धालु स्नान करने और कांवड़ की पूजा करने के बाद वापसी कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को भी हरकी पैड़ी, सुभाष घाट, मालवीय घाट, गऊ घाट, सर्वानंद घाट पर हर तरफ कांवड़िए ही कांवड़िए नजर आए। हरिद्वार के सभी प्रमुख बाजारों में भी कांवड़िए ही नजर आ रहे हैं। दुकानदारों ने भी इस दौरान अपने प्रतिष्ठानों पर केवल कांवड़ यात्रा से संबंधित सामग्री रखी है। दक्ष प्रजापति, मनसा, चंडी और सभी प्रमुख मंदिरों में भी शिवभक्तों की लंबी लाइन लग रही है। भोर से ही मंदिरों में कांवड़िए दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं।

हरिद्वार-नजीबाबाद और हरिद्वार-दिल्ली हाईवे के साथ गंगनहर पटरी पर गंगा के समांतर शिव आस्था की गंगा बह रही है। हर किसी की जुबां से हर हर महादेव और बोल बम के नारे गूंज रहे हैं। यात्रा के आठवें दिन बृहस्पतिवार को 35 लाख शिवभक्तों ने गंगाजल भरा और कांवड़ लेकर अपने घरों की ओर चल पड़े। अब तक एक करोड़ आठ लाख 70 हजार शिव भक्त गंगाजल लेकर जा चुके हैं। हरिद्वार-नजीबाबाद और हरिद्वार दिल्ली हाईवे पर रात के समय निकलने वाली कांवड़ व उसमें शामिल झांकियां आकर्षण का केंद्र बन रही हैं। बड़ी-बड़ी कांवड़ों में रखी देवताओं की मूर्तियों को रंग बिरंगी लाइट से सजाया रहता है। डीजे पर बज रहे भजन और कीर्तन सुनकर हर कोई भक्ति रस में डूब रहा है। भजनों पर शिव भक्त नृत्य करते हुए निकल रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था की चाक चौबंद
कांवड़ यात्रा चरम पर पहुंच चुकी है। दो साल बाद बिना पाबंदी के शुरू हुई कांवड़ यात्रा के सात दिनों में लाखों कांवड़िए गंगाजल लेकर गंतव्यों की तरफ प्रस्थान कर चुके हैं। ऐसे में अगले पांच दिनों तक पुलिस की अग्नि परीक्षा रहेगी। कांवड़ियों की भीड़ को संभालना पुलिस के लिए पांच दिनों तक चुनौती भरा रहेगा। अब बड़ी कांवड़ के साथ ही डाक कांवड़ियों व बाइक सवार कांवड़ियों को शहर से बाहर निकालना पुलिस के लिए चुनौती भरा साबित होगा। हाइवे से लेकर शहर की गलियों व कांवड़ पटरी पर केसरियां रंग में रंगे कांवड़ियों का सैलाब दिख रहा है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब समेत दूूर-दराज के प्रदेशों को पैदल कांवड़ लेकर जाने वाले कांवड़ियां अपने गंतव्यों की तरफ निकल चुके हैं। वहीं बड़ी कांवड़ भी लेकर कांवड़िया अपने गंतव्य की तरफ प्रस्थान करने लगे हैं। पुलिस ने भी सुरक्षा का घेरा और कड़ा कर दिया है। चप्पे चप्पे पर पुलिस फोर्स तैनात है। बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वाड की टीम रेलवे स्टेशन, बस अड्डा, हरकी पैड़ी समेत कई मंदिरों में पहुंचकर चेकिंग कर रही है। अधिकारी भी लगातार मेला क्षेत्र में व्यवस्थाओं पर नजर बनाए हुए हैं।
बड़ी कांवड़ के साथ ही डाक कांवड़ियों को निकालना होगा चुनौती

22 जुलाई (आज) से डाक कांवड़ लेने के लिए भी हरियाणा राजस्थान, दिल्ली, पंजाब के कांवड़िया पहुंचेंगे। जो 24 जुलाई की शाम से डाक कांवड़ लेकर अपने-अपने शिवालयों की तरफ प्रस्थान करेंगे। ऐसे में डाक कांवड़ियों की भीड़ को संभालना पुलिस के लिए अग्नि परीक्षा साबित होगा। डाक कांवड़ियों के साथ ही बाइक पर गंगाजल लेने के लिए आने वाले कांवड़ियां भी इस बार 50 से 60 हजार के करीब होंगे। 24 जुलाई की शाम से हाईवे पर डाक और बाइक सवार कांवड़ियों का ही राज रहेगा। जो 26 जुलाई की दोपहर तक चलेगा। एसएसपी डॉक्टर योगेंद्र सिंह रावत ने बताया कि डाक कांवड़ियों व बाइक सवार कांवड़ियों को मेला क्षेत्र से निकालने के लिए विशेष योजना बनाई है। इस बार हरकी पैड़ी से गंगाजल लेकर जाने वाले कांवड़ियों को आयरिश पुल के नीचे से निकालकर प्रेमनगर फ्लाईओवर पर भेजा जाएगा।



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