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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कांग्रेस पर तंज, सीबीआइ को बेकार संस्था बताने वाली कांग्रेस का अब अचानक कैसे उमड़ आया सीबीआई प्रेम

देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा में बैकडोर से हुई भर्तियों और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर सियासत जारी है। विपक्षी दल कांग्रेस धामी सरकार से इस पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस द्वारा उठाई जा रही सीबीआइ जांच की मांग पर तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अब तक सीबीआइ को बेकार संस्था बताने वाली कांग्रेस का इस जांच एजेंसी के प्रति विश्वास कैसे जग गया। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा का पेपर लीक होने का प्रकरण सामने आने के बाद से मुख्यमंत्री धामी इस मामले में कड़ा रुख अपनाए हुए हैं। इस परीक्षा के साथ ही कुछ अन्य परीक्षाओं में भी ऐसी शिकायत आने पर ये मामले एसटीएफ को सौंपे गए हैं, जबकि वर्ष 2015 में हुई दारोगा भर्ती में अनियमितता की शिकायत आने पर इसकी जांच विजिलेंस को सौंपी गई है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में शुचिता और युवाओं के हित को ध्यान में रखते हुए पेपर लीक प्रकरण की जांच सीबीआइ को सौंपने, हाईकोर्ट के सिटिंग जज से जांच कराने जैसे विकल्पों को लेकर भी सरकार गंभीर है। इसे लेकर मंथन चल रहा है और माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री शीघ्र ही इस बारे में फैसला लेंगे। इस बीच कांग्रेस की ओर से भर्ती परीक्षाओं की सीबीआइ जांच कराने का विषय उठाने पर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की मंशा पर प्रश्न खड़े किए। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कांग्रेस अब तक यह आरोप लगाती आई है कि सीबीआइ बेकार संस्था है। उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। अब भर्ती प्रकरण में उसे सीबीआइ की याद आई है। यह बात साबित करती है कि कांग्रेस केवल और केवल विरोध के लिए विरोध करती है।

उधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले की सीबीआइ द्वारा जांच की जा रही है। उत्तराखंड में भी भर्ती मामले की सीबीआइ जांच होनी चाहिए। कांग्रेस चाहती है कि हाईकोर्ट के सिटिंग जज की देखरेख में मामले की सीबीआइ जांच हो, ताकि इस जांच एजेंसी की निष्पक्षता पर अंगुली न उठे।

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